कुंडली का दूसरा भाव
जन्मकुंडली १२ भावों में विभाजित होती है और प्रत्येक भाव का अपना कारकत्व होता है। किसी जन्मकुंडली का विश्लेषण करने के लिए उसके प्रत्येक भाव तथा नौ ग्रहों के कारकत्वों का ज्ञान आवश्यक है। यहाँ कुंडली के प्रत्येक भाव के कारकत्व का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत है।
द्वितीय भाव:
इसे कुटुंब, धन भाव भी कहते हैं। यह काल पुरुष का मुख है तथा वाणी, स्वाद, दायां नेत्र, धन की बचत मरक स्थान, मुखाकृति, शासन, भाषण शकित का द्योतक है। इसका कारक बृहस्पति है तथा वाणी के लिए बुध कारक है।
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