*दग्ध राशियाँ

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ज्योतिष में दग्ध राशियों का निर्माण तिथि, वार और नक्षत्र

परिचय

आपका स्वागत है हमारे आधारभूत और अद्वितीय लेख में जो ज्योतिष में दग्ध राशियों के निर्माण तिथि, वार और नक्षत्र के बारे में है। ज्योतिष में दग्ध राशियों का महत्वपूर्ण योगदान होता है और इस लेख में हम आपको इस प्रेरणादायक विषय के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान करेंगे।

दग्ध राशियों का मतलब

दग्ध राशियों का मतलब होता है कि जब कोई व्यक्ति अपनी जन्म तिथि के अनुसार अपनी राशि को पहचानता है, तो वह राशि द्वारा प्रतिनिधित्व किए गए गुणों का प्रभाव उसके व्यक्तिगतता और जीवन पर पड़ता है। दग्ध राशियाँ अपने विशेष गुणों और व्यक्तिगतता के आधार पर व्यक्ति की पहचान को और भी मजबूती प्रदान करती हैं।

दग्ध राशियों का निर्माण तिथि

दग्ध राशियों का निर्माण तिथि का महत्वपूर्ण योगदान ज्योतिष में होता है। ज्योतिषशास्त्र में विशेष तिथियाँ और तारीखें बताई गई हैं जिनके अनुसार व्यक्ति की राशि तय की जाती है। यह निर्माण तिथियाँ आकाशीय ग्रहों के स्थान और चाल के आधार पर निर्धारित होती हैं और इनका व्यक्ति के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है।

दग्ध राशियों का वार

ज्योतिष में वार का महत्वपूर्ण योगदान भी होता है। प्रत्येक दिन को एक विशेष ग्रह द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाता है और इसका व्यक्ति के जीवन पर प्रभाव होता है। ज्योतिषशास्त्र में बताया गया है कि किसी व्यक्ति की जन्म तिथि के आधार पर उसके जीवन में विभिन्न ग्रहों की चाल और प्रभाव बदलते रहते हैं, जिससे वह अपने कर्मों के आधार पर अपने भविष्य को निर्माण कर सकता है।

दग्ध राशियों का नक्षत्र

नक्षत्रों का भी अपना महत्व होता है जब बात दग्ध राशियों की होती है। ज्योतिषशास्त्र में विभिन्न नक्षत्रों के आधार पर व्यक्ति की व्यक्तिगतता, भाग्य और गुणों का वर्णन किया गया है। नक्षत्रों के प्रकार और उनके आधार पर व्यक्ति के जीवन में विभिन्न परिवर्तन होते हैं जो उसके भविष्य को प्रभावित करते हैं।



ज्योतिष में दग्ध राशियों का निर्माण तिथि, वार और नक्षत्र के संयोग से होता है। फलित ज्योतिष में इस का काफी महत्त्व है। फलादेश करने के लिए तिथि एक अहं हिस्सा है परंतु ज्योतिषी इन्हें इतना महत्त्व नहीं देते हैं। हर मास में तीस तिथियाँ होती है। 

वर्तमान समय में हर तिथि में दो राशियाँ दग्ध होती है, किन्तु चतुर्दशी की तिथि पर चार राशियाँ दग्ध होती है। पुर्णिमा और अमावस्या के दिन कोई राशि दग्ध नहीं होती। 

*किस तिथि पर कौन सी राशि दग्ध होती है उस का विवरण:*
तिथि दग्ध होनेवाली राशियाँ 

प्रथमा    तुला और मकर 
द्वितीया धनु और मीन 
तृतीया सिंह और मकर 
चतुर्थी  वृषभ और कुम्भ 
पंचमी मिथुन और कन्या 
षष्ठी मेष और सिंह 
सप्तमी कर्क और धनु
अष्टमी मिथुन और कन्या 
नवमी सिंह और वृश्चिक
दशमी सिंह और वृश्चिक
एकादशी धनु और मीन
द्वादशी तुला और मकर
त्रयोदशी  वृषभ और सिंह 
चतुर्दशी मीन, मिथुन, कन्या और धनु
पूर्णिमा/अमावस्या कोई नहीं 

दग्ध राशि का नाम मात्र सुन के भयभीत नहीं होना चाहिए क्यूंकी ये राशियाँ कुछ परिस्थितियों में उत्कृष्ट परिणाम देती है। 
अगर दग्ध राशियाँ कुंडली के त्रिक भाव यानि कि 6, 8 और 12वें भाव में पड़ती है तो अच्छे परिणाम देती है। यहाँ गणित का सिद्धान्त काम करता है, दो ऋणात्म्क स्थितियां एक पॉज़िटिव स्थिति का निर्माण करती है। 
अगर दग्ध राशि किसी अच्छे भाव में पड़ती है तो वह उस भाव के अच्छे परिणाम को नष्ट करती है। 
सूर्य और चंद्र को छोडकर बाकी सब ग्रहों का दो दो राशियों पर आधिपत्य है। अब ऐसे में इन ग्रहों की एक राशि अगर दग्ध होती है तो उस के स्वामित्व वाली दूसरी राशि पर कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। 
अगर कोई शुभ ग्रह वक्री होकर दग्ध राशि में विद्यमान है तो वह ग्रह अपनी महादशा, अंतर्दशा इत्यादि में शुभ फल देता है। किन्तु यही शुभ ग्रह मार्गी होकर दग्ध राशि में पड़ा है तो वह अशुभ परिणाम देता है। दशा का यही नियम हम गोचर में भी लागू कर सकते है। 
अगर कोई अशुभ ग्रह मार्गी है और दग्ध राशि में पड़ा है तो वह उस की महादशा एवं अंतर्दशा में उत्तम परिणाम देता है। किन्तु यही अशुभ ग्रह वक्री है और दग्ध राशि में पड़ा है तो वह अत्यंत कनिष्ठ परिणाम देता है। फिर से मै याद दिला दूँ कि काफी हद तक यह नियम गोचर में भी लागू होता है। 
सूर्य और चंद्र को यह नियम लागू नहीं पड़ते। 

*# दग्ध योग जिस का  निर्माण तिथि और दिन के संयोग से होता है।#* 
1॰ भरणी नक्षत्र और रविवार 
2. चित्रा और सोमवार 
3. उत्तराषाढ़ा और मंगलवार 
4. धनिष्ठा और बुधवार 
5. उत्तराफलगुनी और गुरुवार 
6. ज्येश्ठा और शुक्रवार 
7. रेवती और शनिवार 
*# दग्धयोग जो तिथि और दिन के संयोग से बनता है #*
1 रविवार और 12 तिथि
2 सोमवार और 11 तिथि 
3 मंगलवार और 5 तिथि 
4 बुधवार और 3 तिथि 
5 गुरुवार और 6 तिथि 
6 शुक्रवार और 8 तिथि 
7 शनिवार और 9 तिथि

संक्षिप्त में

इस लेख में, हमने ज्योतिष में दग्ध राशियों के निर्माण तिथि, वार और नक्षत्र के बारे में विस्तार से जानकारी प्रदान की है। यह जानना महत्वपूर्ण है कि ज्योतिष में ये तत्व व्यक्ति के जीवन पर कैसे प्रभाव डालते हैं और उसकी पहचान को कैसे मजबूती प्रदान करते हैं।

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